मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध ने दुनिया भर की ऊर्जा सप्लाई को हिला दिया है। खासकर ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का असर तेल और गैस बाजार पर साफ दिख रहा है। भारत जैसे देशों में भी इसका असर देखने को मिल रहा है, जहां LPG सिलेंडर की सप्लाई पर दबाव बढ़ गया है। ऐसे में सरकार लगातार लोगों को पाइप्ड नेचुरल गैस यानी PNG अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है।
क्या है PNG और LPG में फर्क?
PNG यानी पाइप्ड नेचुरल गैस मुख्य रूप से मीथेन गैस होती है, जो सीधे पाइपलाइन के जरिए घरों तक पहुंचाई जाती है। इसमें सिलेंडर भरवाने या डिलीवरी का इंतजार करने की जरूरत नहीं होती। वहीं LPG (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) प्रोपेन और ब्यूटेन का मिश्रण है, जिसे सिलेंडर में भरकर सप्लाई किया जाता है। यह मुख्य रूप से कच्चे तेल की रिफाइनिंग से तैयार होती है।
कहां से आती है पाइप वाली गैस?
भारत में PNG की सप्लाई दो बड़े सोर्स हैं- घरेलू गैस उत्पादन और आयातित LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस)। देश में कृष्णा-गोदावरी (KG) बेसिन, असम और त्रिपुरा जैसे इलाकों से प्राकृतिक गैस निकलती है। खासकर KG बेसिन भारत के गैस उत्पादन का बड़ा हिस्सा देता है। इसके अलावा भारत कतर, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से LNG आयात करता है, जिसे बाद में गैस में बदलकर पाइपलाइन नेटवर्क के जरिए घरों तक पहुंचाया जाता है।
ईरान युद्ध में LPG क्यों फंसी?
LPG की सबसे बड़ी कमजोरी उसकी सप्लाई चेन है। भारत अपनी करीब 60% LPG जरूरत आयात से पूरी करता है, और इसमें से लगभग 90% सप्लाई स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर आती है। मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने के कारण इस समुद्री रास्ते पर खतरा बढ़ गया है। ड्रोन हमले और मिसाइल हमलों की वजह से टैंकर मूवमेंट प्रभावित हो रहा है, जिससे LPG की सप्लाई में देरी और कमी की आशंका बढ़ जाती है।
PNG क्यों है ज्यादा सुरक्षित?
PNG एक निरंतर सप्लाई सिस्टम पर काम करती है। यह पाइपलाइन के जरिए सीधे घरों तक पहुंचती है, इसलिए इसमें सिलेंडर की तरह लॉजिस्टिक्स का जोखिम नहीं होता। साथ ही, PNG का एक बड़ा हिस्सा भारत में ही पैदा होता है और बाकी LNG अलग-अलग देशों से आयात की जाती है। यानी सप्लाई का स्रोत एक जगह पर निर्भर नहीं है, जिससे जोखिम कम हो जाता है।
सरकार क्यों दे रही PNG पर जोर?
सरकार का मानना है कि PNG, LPG की तुलना में ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद है। इसी वजह से जिन इलाकों में पाइपलाइन की सुविधा है, वहां लोगों को PNG कनेक्शन लेने के लिए कहा जा रहा है। यह कदम देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए उठाया गया है, ताकि किसी भी वैश्विक संकट का असर आम लोगों तक कम से कम पहुंचे।
क्या आगे भी रहेगा ऐसा फर्क?
विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक मिडिल ईस्ट में तनाव बना रहेगा, LPG पर दबाव बना रह सकता है। वहीं PNG अपेक्षाकृत स्थिर बनी रह सकती है। हालांकि, लंबी अवधि में दोनों ही गैसों की सप्लाई ग्लोबल बाजार से प्रभावित होती है, लेकिन PNG का असर आम उपभोक्ताओं पर धीमा और कम दिखाई देता है।